Sanshipt Markandeya Purana in Hindi - संक्षिप्त मार्कण्डेयपुराण
معرفی کتاب «Sanshipt Markandeya Purana in Hindi - संक्षिप्त मार्कण्डेयपुराण» نوشتهٔ Gita Press، منتشرشده توسط نشر Gita Press در سال 2017. این کتاب در فرمت pdf، زبان hi ارائه شده است.
पराम्बा भगवतीकी विस्तृत महिमाका परिचय देनेवाले इस पुराणमें दुर्गासप्तशतीकी कथा एवं माहात्म्य, हरिश्चन्द्रकी कथा, मदालसा-चरित्र, अत्रि-अनसूयाकी कथा, दत्तात्रेय-चरित्र आदि अनेक सुन्दर कथाओंका विस्तृत वर्णन है। 503 पेज में प्रस्तुत है। Table of Contents:- १- जैमिनि-मार्कण्डेय-संवाद—वपुको दुर्वासाका शाप २- सुकृष मुनिके पुत्रोंके पक्षीकी योनिमें जन्म लेनेका कारण ३- धर्मपक्षीद्वारा जैमिनिके प्रश्नोंका उत्तर ४- राजा हरिश्चन्द्रका चरित्र ५- पिता-पुत्र-संवादका आरम्भ, जीवकी मृत्यु तथा नरक-गतिका वर्णन ६- जीवके जन्मका वृत्तान्त तथा महारौरव आदि नरकोंका वर्णन ७- जनक-यमदूत-संवाद, भिन्न-भिन्न पापोंसे विाभिन्न नरकोंकी प्राप्तिका वर्णन ८- पापोंके अनुसार भिन्न-भिन्न योनियोंकी प्राप्ति तथा विपश्चित्के पुण्यदानसे पापियोंका उद्धार ९- दत्तात्रेयजीके जन्म-प्रसङ्गमें एक पतिव्रता ब्राह्मणी तथा अनसूयाजीका चरित्र १०- दत्तात्रेयजीके जन्म और प्रभावकी कथा ११- अलर्कोपाख्यानका आरम्भ—नागकुमारोंके द्वारा ऋतध्वजके पूर्ववृत्तान्तका वर्णन १२- पातालकेतुका वध और मदालसाके साथ ऋतध्वजका विवाह १३- तालकेतुके कपटसे मरी हुई मदालसाकी नागराजके फणसे उत्पत्ति और ऋतध्वजका पाताललोकमें गमन १४- ऋतध्वजको मदालसाकी प्राप्ति, बाल्यकालमें अपने पुत्रोंको मदालसाका उपदेश १५- मदालसाका अलर्कको राजनीतिका उपदेश १६- मदालसाके द्वारा वर्णाश्रमधर्म एवं गृहस्थके कर्तव्यका वर्णन १७- श्राद्ध-कर्मका वर्णन १८- श्राद्धमें विहित और निषिद्ध वस्तुका वर्णन तथा गृहस्थोचित सदाचारका निरूपण १९- त्याज्य-ग्राह्य, द्रव्यशुद्धि, अशौच-निर्णय तथा कर्तव्याकर्तव्यका वर्णन २०- सुबाहुकी प्रेरणासे काशिराजका अलर्कपर आक्रमण, अलर्कका दत्तात्रेयजीकी शरणमें जाना और उनसे योगका उपदेश लेना २१- योगके विघ्न, उनसे बचनेके उपाय, सात धारणा, आठ ऐश्वर्य तथा योगीकी मुक्ति २२- योगचर्या, प्रणवकी महिमा तथा अरिष्टोंका वर्णन और उनसे सावधान होना २३- अलर्ककी मुक्ति एवं पिता-पुत्रके संवादका उपसंहार २४- मार्कण्डेय-क्रौष्टुकि-संवादका आरम्भ, प्राकृत सर्गका वर्णन २५- एक ही परमात्माके त्रिविध रूप, ब्रह्माजीकी आयु आदिका मान तथा सृष्टिका संक्षिप्त वर्णन २६- प्रजाकी सृष्टि, निवास-स्थान जीविकाके उपाय और वर्णाश्रम-धर्मके पालनका माहात्म्य २७- स्वायम्भुव मनुकी वंश-परम्परा तथा अलक्ष्मी-पुत्र दुःसहके स्थान आदिका वर्णन २८- दुःसहकी सन्तानोंद्वारा होनेवाले विघ्न और उनकी शान्तिके उपाय २९- दक्ष प्रजापतिकी संतति तथा स्वायम्भुव सर्गका वर्णन ३०- जम्बूद्वीप और उसके पर्वतोंका वर्णन ३१- श्रीगङ्गाजीकी उत्पत्ति, किम्पुरुष आदि वर्षोंकी विशेषता तथा भारतवर्षके विभाग, नदी, पर्वत और जनपदोंका वर्णन ३२- भारतवर्षमें भगवान् कूर्मकी स्थितिका वर्णन ३३- भद्राश्व आदि वर्षोंका संक्षिप्त वर्णन ३४- स्वरोचिष् तथा स्वारोचिष मनुके जन्म एवं चरित्रका वर्णन ३५- पद्मिनी विद्याके अधीन रहनेवाली आठ निधियोंका वर्णन ३६- राजा उत्तमका चरित्र तथा औत्तम मन्वन्तरका वर्णन ३७- तामस मनुकी उत्पत्ति तथा मन्वन्तरका वर्णन ३८- रैवत मनुकी उत्पत्ति और उनके मन्वन्तरका वर्णन ३९- चाक्षुष मनुकी उत्पत्ति और उनके मन्वन्तरका वर्णन ४०- वैवस्वत मन्वन्तरकी कथा तथा सावर्णिक मन्वन्तरका संक्षिप्त परिचय ४१- मेधा ऋषिका राजा सुरथ और समाधिको भगवतीकी महिमा बताते हुए मधु-कैटभ-वधका प्रसङ्ग सुनाना ४२- देवताओंके तेजसे देवीका प्रादुर्भाव और महिषासुरकी सेनाका वध ४३- सेनापतियोंसहित महिषासुरका वध ४४- इन्द्रादि देवताओंद्वारा देवीकी स्तुति ४५- देवताओंद्वारा देवीकी स्तुति, चण्ड-मुण्डके मुखसे अम्बिकाके रूपकी प्रशंसा सुनकर शुम्भका उनके पास दूत भेजना और दूतका निराश लौटना ४६- धूम्रलोचन-वध ४७- चण्ड और मुण्डका वध ४८- रक्तबीज-वध ४९- निशुम्भ-वध ५०- शुम्भ-वध ५१- देवताओंद्वारा देवीकी स्तुति तथा देवीद्वारा देवताओंको वरदान ५२- देवी-चरित्रोंके पाठका माहात्म्य ५३- सुरथ और वैश्यको देवीका वरदान ५४- नवेंसे लेकर तेरहवें मन्वन्तरतकका संक्षिप्त वर्णन ५५- रौच्य मनुकी उत्पत्ति-कथा ५६- भौत्य मन्वन्तरकी कथा तथा चौदह मन्वन्तरोंके श्रवणका फल ५७- सूर्यका तत्त्व, वेदोंका प्राकट्य, ब्रह्माजीद्वारा सूर्यदेवकी स्तुति और सृष्टि-रचनाका आरम्भ ५८- अदितिके गर्भसे भगवान् सूर्यका अवतार ५९- सूर्यकी महिमाके प्रसङ्गमें राजा राज्यवर्धनकी कथा ६०- दिष्टपुत्र नाभागका चरित्र ६१- वत्सप्रीके द्वारा कुजृम्भका वध तथा उसका मुदावतीके साथ विवाह ६२- राजा खनित्रकी कथा ६३- क्षुप, विविंश, खनीनेत्र, करन्धम, अवीक्षित तथा मरुत्तके चरित्र ६४- राजा नरिष्यन्त और दमका चरित्र ६५- श्रीमार्कण्डेयपुराणका उपसंहार और माहात्म्य शीर्षक पृष्ठ कॉपीराइट पृष्ठ निवेदन संक्षिप्त मार्कण्डेयपुराणकी विषय-सूची चित्र-सूची १- जैमिनि-मार्कण्डेय-संवाद—वपुको दुर्वासाका शाप २- सुकृष मुनिके पुत्रोंके पक्षीकी योनिमें जन्म लेनेका कारण ३- धर्मपक्षीद्वारा जैमिनिके प्रश्नोंका उत्तर ४- राजा हरिश्चन्द्रका चरित्र ५- पिता-पुत्र-संवादका आरम्भ, जीवकी मृत्यु तथा नरक-गतिका वर्णन ६- जीवके जन्मका वृत्तान्त तथा महारौरव आदि नरकोंका वर्णन ७- जनक-यमदूत-संवाद, भिन्न-भिन्न पापोंसे विाभिन्न नरकोंकी प्राप्तिका वर्णन ८- पापोंके अनुसार भिन्न-भिन्न योनियोंकी प्राप्ति तथा विपश्चित्के पुण्यदानसे पापियोंका उद्धार ९- दत्तात्रेयजीके जन्म-प्रसङ्गमें एक पतिव्रता ब्राह्मणी तथा अनसूयाजीका चरित्र १०- दत्तात्रेयजीके जन्म और प्रभावकी कथा ११- अलर्कोपाख्यानका आरम्भ—नागकुमारोंके द्वारा ऋतध्वजके पूर्ववृत्तान्तका वर्णन १२- पातालकेतुका वध और मदालसाके साथ ऋतध्वजका विवाह १३- तालकेतुके कपटसे मरी हुई मदालसाकी नागराजके फणसे उत्पत्ति और ऋतध्वजका पाताललोकमें गमन १४- ऋतध्वजको मदालसाकी प्राप्ति, बाल्यकालमें अपने पुत्रोंको मदालसाका उपदेश १५- मदालसाका अलर्कको राजनीतिका उपदेश १६- मदालसाके द्वारा वर्णाश्रमधर्म एवं गृहस्थके कर्तव्यका वर्णन १७- श्राद्ध-कर्मका वर्णन १८- श्राद्धमें विहित और निषिद्ध वस्तुका वर्णन तथा गृहस्थोचित सदाचारका निरूपण १९- त्याज्य-ग्राह्य, द्रव्यशुद्धि, अशौच-निर्णय तथा कर्तव्याकर्तव्यका वर्णन २०- सुबाहुकी प्रेरणासे काशिराजका अलर्कपर आक्रमण, अलर्कका दत्तात्रेयजीकी शरणमें जाना और उनसे योगका उपदेश लेना २१- योगके विघ्न, उनसे बचनेके उपाय, सात धारणा, आठ ऐश्वर्य तथा योगीकी मुक्ति २२- योगचर्या, प्रणवकी महिमा तथा अरिष्टोंका वर्णन और उनसे सावधान होना २३- अलर्ककी मुक्ति एवं पिता-पुत्रके संवादका उपसंहार २४- मार्कण्डेय-क्रौष्टुकि-संवादका आरम्भ, प्राकृत सर्गका वर्णन २५- एक ही परमात्माके त्रिविध रूप, ब्रह्माजीकी आयु आदिका मान तथा सृष्टिका संक्षिप्त वर्णन २६- प्रजाकी सृष्टि, निवास-स्थान जीविकाके उपाय और वर्णाश्रम-धर्मके पालनका माहात्म्य २७- स्वायम्भुव मनुकी वंश-परम्परा तथा अलक्ष्मी-पुत्र दुःसहके स्थान आदिका वर्णन २८- दुःसहकी सन्तानोंद्वारा होनेवाले विघ्न और उनकी शान्तिके उपाय २९- दक्ष प्रजापतिकी संतति तथा स्वायम्भुव सर्गका वर्णन ३०- जम्बूद्वीप और उसके पर्वतोंका वर्णन ३१- श्रीगङ्गाजीकी उत्पत्ति, किम्पुरुष आदि वर्षोंकी विशेषता तथा भारतवर्षके विभाग, नदी, पर्वत और जनपदोंका वर्णन ३२- भारतवर्षमें भगवान् कूर्मकी स्थितिका वर्णन ३३- भद्राश्व आदि वर्षोंका संक्षिप्त वर्णन ३४- स्वरोचिष् तथा स्वारोचिष मनुके जन्म एवं चरित्रका वर्णन ३५- पद्मिनी विद्याके अधीन रहनेवाली आठ निधियोंका वर्णन ३६- राजा उत्तमका चरित्र तथा औत्तम मन्वन्तरका वर्णन ३७- तामस मनुकी उत्पत्ति तथा मन्वन्तरका वर्णन ३८- रैवत मनुकी उत्पत्ति और उनके मन्वन्तरका वर्णन ३९- चाक्षुष मनुकी उत्पत्ति और उनके मन्वन्तरका वर्णन ४०- वैवस्वत मन्वन्तरकी कथा तथा सावर्णिक मन्वन्तरका संक्षिप्त परिचय ४१- मेधा ऋषिका राजा सुरथ और समाधिको भगवतीकी महिमा बताते हुए मधु-कैटभ-वधका प्रसङ्ग सुनाना ४२- देवताओंके तेजसे देवीका प्रादुर्भाव और महिषासुरकी सेनाका वध ४३- सेनापतियोंसहित महिषासुरका वध ४४- इन्द्रादि देवताओंद्वारा देवीकी स्तुति ४५- देवताओंद्वारा देवीकी स्तुति, चण्ड-मुण्डके मुखसे अम्बिकाके रूपकी प्रशंसा सुनकर शुम्भका उनके पास दूत भेजना और दूतका निराश लौटना ४६- धूम्रलोचन-वध ४७- चण्ड और मुण्डका वध ४८- रक्तबीज-वध ४९- निशुम्भ-वध ५०- शुम्भ-वध ५१- देवताओंद्वारा देवीकी स्तुति तथा देवीद्वारा देवताओंको वरदान ५२- देवी-चरित्रोंके पाठका माहात्म्य ५३- सुरथ और वैश्यको देवीका वरदान ५४- नवेंसे लेकर तेरहवें मन्वन्तरतकका संक्षिप्त वर्णन ५५- रौच्य मनुकी उत्पत्ति-कथा ५६- भौत्य मन्वन्तरकी कथा तथा चौदह मन्वन्तरोंके श्रवणका फल ५७- सूर्यका तत्त्व, वेदोंका प्राकट्य, ब्रह्माजीद्वारा सूर्यदेवकी स्तुति और सृष्टि-रचनाका आरम्भ ५८- अदितिके गर्भसे भगवान् सूर्यका अवतार ५९- सूर्यकी महिमाके प्रसङ्गमें राजा राज्यवर्धनकी कथा ६०- दिष्टपुत्र नाभागका चरित्र ६१- वत्सप्रीके द्वारा कुजृम्भका वध तथा उसका मुदावतीके साथ विवाह ६२- राजा खनित्रकी कथा ६३- क्षुप, विविंश, खनीनेत्र, करन्धम, अवीक्षित तथा मरुत्तके चरित्र ६४- राजा नरिष्यन्त और दमका चरित्र ६५- श्रीमार्कण्डेयपुराणका उपसंहार और माहात्म्य
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